बरारी प्रखंड कार्यालय के सभागार में आयोजित बीस सूत्री कार्यक्रम की बैठक को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि योजनाओं से जुड़े कार्यों की वास्तविक स्थिति को छुपाने और कथित अनियमितताओं से बचने के उद्देश्य से यह बैठक बंद दरवाजों के पीछे गोपनीय तरीके से आयोजित की गई।
सूत्रों के अनुसार, बैठक में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की जगह उनके प्रतिनिधि शामिल हुए। बताया जा रहा है कि जहां एक ओर प्रमुख की जगह प्रमुख पति की मौजूदगी रही, वहीं कई पंचायतों से मुखिया के स्थान पर मुखिया प्रतिनिधि बैठक में शामिल थे। इस दौरान प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) समेत कुछ जनप्रतिनिधियों द्वारा मनमाने ढंग से निर्णय लिए जाने के भी आरोप सामने आ रहे हैं।
आरोप यह भी है कि बैठक की जानकारी जानबूझकर मीडिया से साझा नहीं की गई, ताकि योजनाओं की समीक्षा और लिए गए फैसलों पर सार्वजनिक चर्चा न हो सके। जब बैठक की भनक लगने पर कुछ पत्रकार कवरेज के लिए प्रखंड सभागार पहुंचे, तो उन्हें अंदर जाने से रोक दिया गया। पत्रकारों को यह कहकर बाहर ही रोक दिया गया कि “गोपनीय बैठक” चल रही है।
इस घटनाक्रम से पत्रकारों में रोष देखा गया और इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था तथा प्रेस की स्वतंत्रता के खिलाफ बताया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि बीस सूत्री जैसी महत्वपूर्ण बैठक पूरी तरह जनहित से जुड़ी होती है, जिसमें पारदर्शिता और सार्वजनिक निगरानी बेहद जरूरी है। ऐसी बैठकों में मीडिया की भूमिका अहम होती है, लेकिन पत्रकारों को दूर रखना संदेह को और गहरा करता है।
पूरे मामले को लेकर अब प्रशासनिक स्तर पर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि बैठक में शामिल सदस्यों की उपस्थिति सूची और लिए गए निर्णयों को सार्वजनिक किया जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता बनी रहे।
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बरार । कटिहार