तीन दशक तक मां भगवती की सेवा करने वाले पुजारी बबलू झा पंचतत्व में विलीन, नम आंखों से दी गई अंतिम विदाई


मनीष मिश्रा बरारी, कटिहार | संवाद सूत्र
फाईल फोटो एक्स

बरारी नगर पंचायत स्थित ऐतिहासिक सार्वजनिक भगवती मंदिर के मुख्य पुजारी बबलू झा उर्फ प्रदीप कुमार झा (48) के निधन से बरारी सहित आसपास के क्षेत्रों में शोक का माहौल है। मंगलवार की शाम पूर्णिया के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान उनका निधन हो गया। उनके निधन की खबर मिलते ही श्रद्धालुओं, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं स्थानीय लोगों में शोक की लहर दौड़ गई।
बताया जाता है कि बबलू झा पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे और उनका इलाज पूर्णिया में चल रहा था। मंगलवार की शाम उन्होंने अंतिम सांस ली। वे करीब 30 वर्षों से सार्वजनिक भगवती मंदिर में मुख्य पुजारी के रूप में सेवा दे रहे थे। मंदिर की दैनिक पूजा-अर्चना से लेकर धार्मिक अनुष्ठानों तक में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती थी। उनके सरल स्वभाव, धार्मिक निष्ठा और समाज के प्रति समर्पण के कारण क्षेत्र में उनकी अलग पहचान थी।
निधन की सूचना मिलते ही उनके आवास पर श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लग गया। बरारी नगर पंचायत की मुख्य पार्षद बबीता कुमारी, मुख्य पार्षद प्रतिनिधि नीरज कश्यप उर्फ हिटलर यादव, राजद के पूर्व प्रखंड अध्यक्ष विश्वनाथ चौधरी, जदयू प्रखंड अध्यक्ष मनोज कुशवाहा, जदयू नेता चन्द्रमोहन सिंह, एमएलसी प्रतिनिधि राजीव कुमार भारती, जिला परिषद सदस्य गुणसागर पासवान, कांग्रेस प्रखंड अध्यक्ष सिमरनजीत सिंह, कांग्रेस नेता तौकीर आलम, पूर्व मुखिया अमरेंद्र सिंह संजू, राजद नेता बिमल मालाकार, विवेकानंद झा, संजू सिंह, अमरजीत सिंह, भोला सिंह सहित बड़ी संख्या में लोगों ने पहुंचकर शोक संवेदना व्यक्त की।
सार्वजनिक भगवती मंदिर समिति के सचिव पंकज यादव, अध्यक्ष कौशल किशोर यादव, कोषाध्यक्ष मुकेश झा एवं उप सचिव धनजीत यादव ने कहा कि बबलू झा का निधन मंदिर परिवार और पूरे क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति है। उनकी धार्मिक सेवाओं को हमेशा याद किया जाएगा।
बबलू झा अपने पीछे पत्नी कोमल झा तथा तीन पुत्रियों सहित संयुक्त परिवार छोड़ गए हैं। परिवार की आर्थिक और सामाजिक जिम्मेदारियां मुख्य रूप से उन्हीं पर थीं। उनके असमय निधन से परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
बुधवार को काढ़ागोला घाट पर पूरे वैदिक रीति-रिवाज के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनके छोटे भाई बमबम झा ने मुखाग्नि दी। अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, ग्रामीण एवं गणमान्य लोग मौजूद रहे। सभी ने उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और नम आंखों से अंतिम विदाई दी।

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