विकसित भारत गारंटी कानून का अर्थ काम के अधिकार की समाप्ति : मजदूर

नरेगा कानून खत्म करने के विरोध में सड़कों पर उतरा जन जागरण शक्ति संगठन


बरारी (कटिहार)
महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी कानून (मनरेगा) को समाप्त करने के विरोध में गुरुवार को जन जागरण शक्ति संगठन, जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय तथा नरेगा संघर्ष मोर्चा के संयुक्त तत्वावधान में बरारी प्रखंड मुख्यालय स्थित मनरेगा कार्यालय के समक्ष जोरदार विरोध प्रदर्शन किया गया। इस दौरान सिक्कट से धरना स्थल तक रैली निकाली गई, जिसके बाद धरना स्थल पर सभा आयोजित कर प्रखंड विकास पदाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा गया।

रैली में सैकड़ों मजदूर शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने एक स्वर में कहा कि संसदीय नियमों को दरकिनार करते हुए आनन-फानन में पारित किए गए “विकसित भारत गारंटी रोजगार एवं आजीविका मिशन अधिनियम” का वे पुरजोर विरोध करते हैं। मजदूरों ने कहा कि मनरेगा कानून उन्हें साल में 100 दिन काम पाने का कानूनी अधिकार देता था। मजदूर काम मांगते थे और सरकार को देना अनिवार्य था, लेकिन नए कानून में यह अधिकार समाप्त कर सरकार को मनमाने तरीके से काम खोलने या न खोलने की छूट दे दी गई है।

प्रदर्शनकारियों ने बताया कि आज ही राज्यसभा में यह नया कानून पारित कराया गया है। नए प्रावधानों के तहत अब केंद्र सरकार राज्यों द्वारा इस कानून पर होने वाले खर्च की सीमा तय करेगी और राज्यों को 40 प्रतिशत राशि वहन करनी होगी, जबकि मनरेगा में केंद्र सरकार लगभग 90 प्रतिशत खर्च उठाती थी। पहले राशि मांग-आधारित आवंटन होता था, जिसे अब केंद्र सरकार के नियंत्रण में कर दिया गया है। इसके साथ ही खेती के मौसम में साल में 60 दिन काम बंद रखने का प्रावधान किया गया है।

मजदूर नेताओं ने आरोप लगाया कि इस कानून के माध्यम से ग्राम सभाओं के अधिकारों पर भी हमला किया गया है। अब कौन-सा काम होगा, उसकी प्राथमिकता और चयन ग्राम सभा द्वारा तय नहीं होकर विकसित भारत स्टैक के अनुसार होगा।

सभा को संबोधित करते हुए जन जागरण शक्ति संगठन की संयुक्त सचिव रीना देवी ने कहा कि सरकार मनमाने तरीके से फैसले ले रही है। बिहार में हर साल लगभग 50 लाख और देशभर में करीब 5 करोड़ परिवार मनरेगा से जुड़े हैं। इतने महत्वपूर्ण कानून को बिना व्यापक चर्चा और बहस के पारित करना लोकतंत्र के लिए खतरनाक है। इससे पूरे देश के मजदूरों में आक्रोश है।

जयमंती कुमारी ने कहा कि मनरेगा कानून ने मजदूरों को 100 दिनों के काम का अधिकार दिया था, लेकिन अब यह अधिकार छीन लिया गया है। नई योजना के तहत साल में दो महीने काम बंद रहेगा और बिहार जैसे गरीब राज्यों पर हजारों करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। पहले मजदूरी का पूरा खर्च केंद्र सरकार देती थी, ऐसे में अब 100 दिन का काम मिलना लगभग असंभव है।

कांग्रेस के बरारी के वरिष्ठ नेता सह विधानसभा प्रत्याशी तौकिर ने कहा कि भाजपा सरकार मनरेगा मजदूरों की मजदूरी बंद करना चाहती है, लेकिन ऐसा होने नहीं दिया जाएगा। इसके लिए सड़क से संसद तक संघर्ष किया जाएगा। वहीं फुलेश्वर ऋषि ने कहा कि जब सरकार 125 दिन काम देने की बात कर रही है तो कानून बदलने और महात्मा गांधी का नाम हटाने की क्या जरूरत थी, इससे सरकार की मंशा पर सवाल खड़े होते हैं।  रैली एवं धरना प्रदर्शन में रीना देवी, जयमंती कुमारी, कांग्रेस प्रखंड अध्यक्ष सिमरंजीत सिंह, राजद नेता अमरेन्द्र सिंह संजू, विमल मालाकार, गुड्डू मुस्तफा, वंटी यादव, प्रियंका कुमारी, पूजा कुमारी, जोहन, खुशबू, सुनील परिहार, पवन कुमार, दल्लू ऋषि सहित सैकड़ों मजदूर और राष्ट्रीय समन्वय व मनरेगा संघर्ष मोर्चा के कार्यकर्ता शामिल रहे।


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